पहला नशा पहला खुमार...नया प्यार है नया इंतज़ार...1993 की फ़िल्म जो जीता वही सिकंदर का ये कर्णप्रिय प्रेम गीत दिल और भावनाओं के बेहद करीब है और सदा ही all time favourite रहा है। पिछले कई सालों से cassettes, CDs, PC, LAPTOP, Tabs , MEMORY CARDs में ये गीत सदा साथ रहा है, उस दौर में भी जब 2GB MEMORY भी LUXURY थी तब 15MB का ये गीत साथ रहा है।
90s के गीतों में संगीत ज्यादा था और शोर कम। 90s के गीतों मे मासूमियत, गंभीरता , संजीदगी , सादगी , कम में भी बहुत , असंतृप्ति का पता होकर भी संतृप्ति, content था सबकुछ..
गीतों के पिक्चराइजेशन में , अभिनेताओं के हाव भाव तथा अभिव्यक्ति में ये सब महसूस किया जा सकता है।
उस दौर को रिप्रेजेंट करता हुआ सा , स्कूल की किशोर उम्र में प्रेम को दिखाने बताने वाला ये गीत है। फ़िल्म " जो जीता वही सिकंदर" फ़िल्म का ये गीत "पहला नशा पहला खुमार" से बेहतर शायद कुछ दूसरा नही हो सकता है , ये गीत एक धीमा जहर और खुमारी से भरा हुआ है। इस गीत के रिलीज होने, फ़िल्म के आने के समय ये कोई सुपरहिट नहीं था, धीरे धीरे ही ये लोगो के करीब आता गया, और धीमे से एक cult बन गया , और शायद अब भी इसका खुमार चढ़ रहा है एवं अब भी बाकी है..
मैं 90s के दौर में बड़ा हुआ हूँ, इसलिए उस दौर से उस जमाने की चीजों से व्यक्तिगत लगाव है, शायद बहुत से लोगों को भी होगा। उस दौर को याद करता हूँ तो लगता है कि उस दौर की हर चीज में एक ठहराव था, एक खूबसूरत सा ठहराव, एक slow motion जैसा ठहराव.., ये ठहराव उस दौर के प्रेम के हर रूप में भी था, क्योंकि तब न तो break up शब्द से उस दौर के युवाओं का परिचय था, न ही अभी के instant दौर जैसी क्षण भंगुरता थी। ये ठहराव उस दौर के फिल्मी गीतों के स्लो टेम्पो में भी था , तब शब्दों में समाए भावों को उसकी धुन एवं संगीत से गहरी अभिव्यक्ति होती थी...
...मिथुन दादा और बप्पी लहरी के संगम से कोई क्या ही उम्मीद करेगा? तो इनके संगम से एक तरफ गीत बना कि- चढ़ गया ऊपर रे, गुटूर गुटूर ..पर वहीं उसी फ़िल्म से याद रह जाने वाला एक ये गीत भी निकला कि-" ठहरे हुए पानी में कंकर न मार ..।
वाद्य यंत्र संगीत भी पैदा करते हैं और शोर भी, मगर शोर और संगीत में एक फर्क होता है जो महसूस करने की चीज है...
आज जिस आसानी से मोबाइल एवं इंटरनेट के माध्यम से लोग अभिव्यक्त कर पाते हैं, कनेक्ट हो पाते हैं , तब ऐसी आसानी नहीं थी। फ़िल्म में हीरो के बड़े भाई का रोल करने वाले मामिक जिस तरह से ग्रोसरी बैग में प्रेमपत्र रखता है , वैसी धर्मसंकट और बड़ी परेशानी को इस मोबाइल के दौर वाली पीढ़ी कभी समझ ही नहीं सकेगी। कुछ सालों बाद आये टेलीकॉम ऑपरेटर एयरटेल का punch line ही था- "Express Yourself " . Telecom एवं internet ने सचमुच काफी कुछ बदल दिया.
experts का मानना है कि internet के बाद दुनिया बदल देने वाला कोई बड़ा आविष्कार अब तक नहीं हुआ है तथा 25-30 बरस से युगपरिवर्तन करने वाले आविष्कार की जगह खाली है।
उल्लास एवं उत्सव तथा शोक एवं ग़म, दोनो ही ज़िन्दगी के विरोधाभासी भाव हैं और पहलू भी हैं। दोनो का अपना मजा है और सज़ा भी है। बुद्धिमानी दोनो भावों का आनंद लेने में है। एक दूसरे के contrast से दोनो निखरते हैं। जीवन के अच्छे बुरे मध्यम सभी रंगों को समग्रता से लेना ही बेहतर एवं बुद्धिमानी है।
स्लो मोशन में फिल्माए गए इस गीत के बाद हिंदी फिल्मी गीतों में स्लो मोशन में फिल्माने का एक दौर चल पड़ा था, जो कि 1942 A love story के गीत इक लड़की को देखा तो ऐसा लगा से और भी बढ़ा..आज तक चला ही आ रहा है। अब तो मोबाइल के कैमेरास में भी slo mo का feature होता है और इसके बहुत प्रयोग होते हैं।
40+ की उम्र वाले तो उस दौर का व्यक्तिगत अनुभव होने की वजह से 90s की फिल्मों और गीतों से जुड़ाव महसूस करते हैं , पर कई बार आश्चर्य होता है कि 20-30 वर्षीय लोग भी 90s के गीत संगीत और फिल्मों का आनंद ले रहे होते हैं।
90s के एलबम्स, सैटेलाइट टीवी चैनल्स एवं टॉकीजों के दौर से आज के multiscreen, मोबाइल यूट्यूब OTT के दौर तक गीतों फ़िल्मों और आम जीवन मे बहुत ज्यादा बदलाव हुए हैं, कभी कभी तुलना करने पर ये समझ नहीं आता कि क्या कहें, वो दौर अच्छा था या कि ये...
खैर जो कुछ भी हो , ये गीत पहला नशा, पहला खुमार... सदा से मासूम प्यार की अभिव्यक्ति रहा है..दिल, याद, भावनाओं के बेहद ही करीब... ये रही लिंक..सुनिए , सुनाइये..
